असली ब्राह्मण कौन है


  • पूर्वकाल में ब्राह्मण होने के लिए शिक्षा, दीक्षा और कठिन तप करना होता था। इसके बाद ही उसे ब्राह्मण कहा जाता था। गुरुकुल की अब वह परंपरा नहीं रही। जिन लोगों ने ब्राह्मणत्व अपने प्रयासों से हासिल किया था उनके कुल में जन्मे लोग भी खुद को ब्राह्मण समझने लगे। ऋषि-मुनियों की वे संतानें खुद को ब्राह्मण मानती हैं, जबकि उन्होंने न तो शिक्षा ली, न दीक्षा और न ही उन्होंने कठिन तप किया। वे जनेऊ का भी अपमान करते देखे गए हैं।
    शराब पीकर, मांस खाकर और असत्य वचन बोलकर भी खुद कोई ब्राह्मण नहीं कह सकता हैं। धर्म के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं रखकर, धर्म के बारे में मनमानी बाते बोलकर या धर्मविरोधी वचन बोलकर खुद को ब्राह्मण कहने वाले ब्राह्मण नहीं हो सकते।
  • सद्गुरु कबीर साहेब की अन्धविश्वास, पाखंड, भेदभाव, जातिप्रथा, पर करारी चोट की थी जैसे-
    ” जो तूं ब्रह्मण , ब्राह्मणी का जाया !  आन काहे नहीं आया !! ”–   अपने आप को ब्राह्मण होने पर गर्व करने वाले ज़रा यह तो बताओ की जो तुम अपने आप की महान कहते तो फिर तुम किसी अन्य रास्ते से जाँ तरीके से पैदा क्यों नहीं हुआ ? जिस रास्ते से हम सब पैदा हुए हैं, तुम भी उसी रास्ते से ही क्यों पैदा हुए है 

  • आज के शिक्षित कहे जाने वाले एंव बड़ी-बड़ी डिग्रियों के मालिको के पास क्या वह ज्ञान है जो कबीर के पास था?
    बड़े-बड़े अधिकारी, राजनेता कोई भी कार्य का आरम्भ अनपढ़ ब्राह्मणों के द्वारा करते है क्या यह ज्ञान है?
    मानसिक गुलामी ईश्वर, धर्म ग्रंथो के नाम पर ही फैली है जब तक इस कोरे- काल्पनिक अन्धविश्वास का जाल नही ध्वस्त होगा तब तक अनपढ़ पाखण्डी आसाराम जैसे बलात्कारी मौज उड़ाते रहेंगे।
    मूर्खो की तरह निर्मल बाबा की जय करते रहेंगे।
    अज्ञान को महापुरुषो के संघर्ष भरे इतिहास से ही खत्म होगा।

Comments

Popular posts from this blog

कबीर ही अल्ला है

सत भक्ति से मोक्ष होता है

बीमारी से छुटकारा कसे पाए